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बुधवार, 17 जुलाई 2019
 
 

तीन तलाक बिल लोकसभा में पास, कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने वॉकआउट किया

शुक्रवार, 28 दिसम्बर, 2018  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
भारत के लोकसभा में तीन तलाक बिल पारित हो गया है। गुरुवार को सदन में बिल पर चर्चा के दौरान मोदी सरकार और विपक्ष के बीच जबरदस्त घमासान हुआ और शाम को इससे जुड़े संशोधन प्रस्तावों पर वोटिंग हुई। वोटिंग में इसके पक्ष में 245 और विरोध में 11 वोट पड़े। एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के सभी संशोधन प्रस्ताव खारिज हो गए।

हालांकि वोटिंग के समय कांग्रेस और एआईएडीएमके ने लोकसभा से वॉकआउट कर दिया। चर्चा के दौरान कांग्रेस, टीएमसी समेत कई विपक्षी दल तीन तलाक बिल को ज्वॉइंट सेलेक्ट कमिटी के पास भेजने की मांग पर अड़े रहे। लोकसभा में तीन तलाक बिल को पास कराने के लिए बीजेपी ने पहले ही अपने सांसदों को व्हीप जारी कर सदन में उपस्थित होने को कहा था।

लोकसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि महिलाओं के नाम पर लाया गया यह बिल समाज को जोड़ने का नहीं, समाज को तोड़ने का बिल है। उन्होंने कहा कि यह समानता के अधिकार और इस्लाम के भी खिलाफ है। खड़गे ने कहा कि धर्म के नाम पर यह बिल भेदभाव करता है और धार्मिक आजादी के खिलाफ है। खड़गे ने कहा कि संविधान के मूल आधार के खिलाफ सरकार कोई भी कानून नहीं बना सकती है।

मुस्लिम समाज में एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाये गए 'मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक' को महिलाओं के न्याय एवं सम्मान का विषय करार देते हुए मोदी सरकार ने कहा कि इसे राजनीति के तराजू पर तौलने की बजाय इंसाफ के तराजू पर तौलते हुए पूरे संसद को सर्व सम्मति में इसे पारित करना चाहिए। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक को चर्चा के लिए रखते हुए इसके बारे में कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा तीन तलाक असंवैधानिक घोषित करने की पृष्ठभूमि में यह विधेयक लाया गया है। जनवरी 2017 के बाद से तीन तलाक के 417 वाकये सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि पत्नी ने रोटी जला दी, पत्नी मोटी हो .. ऐसे मामलों में भी तीन तलाक दिये गए हैं। प्रसाद ने कहा कि 20 से अधिक इस्लामी मुल्कों में तीन तलाक नहीं है। हमने पिछले विधेयक में सुधार किया है और अब मजिस्ट्रेट जमानत दे सकता है। मंत्री ने कहा कि संसद ने दहेज के खिलाफ कानून बनाया, घरेलू हिंसा के खिलाफ कानून बनाया, महिलाओं पर अत्याचार रोकने के लिये कानून बनाया। तब यह संसद तीन तलाक के खिलाफ एक स्वर में क्यों नहीं बोल सकती? रविशंकर प्रसाद ने कहा, ''इस पूरे मामले को सियासत की तराजू पर नहीं तौलना चाहिए, इस विषय को इंसाफ के तराजू पर तौलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई सुझाव है तो बताये। ... लेकिन सवाल यह है कि क्या राजनीतिक कारणों से तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को न्याय नहीं मिलेगा। उन्होंने कि यह नारी सम्मान एवं न्याय से जुड़ा है और संसद को एक स्वर में इसे पारित करना चाहिए।

भाजपा की मीनाक्षी लेखी ने विधेयक को नरेंद्र मोदी सरकार का ऐतिहासिक कदम करार देते हुए कहा कि तीन तलाक को उच्चतम न्यायालय ने असंवैधानिक बताया और इस प्रथा का कुरान में कहीं उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति के कारण यह प्रथा अब तक चलती आई है जिसका खामियाजा मुस्लिम महिलाओं को भुगतना पड़ा है। भाजपा सांसद ने कहा कि कई इस्लामी देशों में तीन तलाक को खत्म किया जा चुका है, लेकिन भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में चल रहा है। मीनाक्षी लेखी ने कहा कि अगर कांग्रेस 30 साल पहले कदम उठाती तो उसी वक्त इतिहास बदल जाता। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में महिलाओं के लिए कई कदम उठाए हैं और यह भी मुस्लिम महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए उठाया गया है।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि तीन तलाक संबंधी विधेयक मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिये है। यह किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं लाया गया है।

विधेयक का समर्थन करते हुए शिवसेना के अरविंद सावंत ने कहा कि इसके कानून बनने से मुस्लिम महिलाएं सबसे ज्यादा खुश होंगी।

विधेयक पर चर्चा की शुरूआत करते हुए कांग्रेस की सुष्मिता देव ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक के खिलाफ नहीं है, लेकिन सरकार के 'मुंह में राम, बगल में छूरी' वाले रुख के विरोध में है क्योंकि सरकार की मंशा मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने एवं उनका सशक्तीकरण की नहीं, बल्कि मुस्लिम पुरुषों को दंडित करने की है।

बीजेडी ने इस विधेयक का लोक सभा में विरोध किया। बीजू जनता दल (बीजद) के रवींद्र कुमार जेना ने आरोप लगाया कि यह विधेयक एक धर्म विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है। उन्होंने विधेयक को संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ करार देते हुए कहा कि प्रस्तावित कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं।

तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के जयदेव गल्ला ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि सरकार राजनीतिक लाभ की मंशा से तीन तलाक संबंधी अध्यादेश लाई थी, लेकिन पांच राज्यों के हालिया विधानसभा चुनावों में उससे कोई लाभ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि सरकार को तीन तलाक पीड़ित मुस्लिम महिलाओं की चिंता से पहले भीड़ द्वारा हत्या की घटनाओं से पीड़ित मुस्लिम पुरुषों एवं महिलाओं पर ध्यान देना चाहिए। गल्ला ने कहा कि इस विधेयक को संसदीय समिति या प्रवर समिति के पास भेजा जाना चाहिए।

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के जितेंद्र रेड्डी ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इस विधेयक को लाने की मंशा और समय को लेकर बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के सशक्तीकरण के लिए जरूरी है कि सरकार को उनकी शिक्षा एवं रोजगार पर ध्यान देना चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाने के लिए लाया गया विधेयक स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन अपनी पत्नी को फौरी तीन तलाक देने के दोषी पति के लिए जेल की सजा के प्रावधान का उनकी पार्टी विरोध करती है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी मांग करती है कि इस विधेयक को विचार के लिए प्रवर समिति के पास भेजा जाए। बंद्योपाध्याय ने कहा कि फौरी तीन तलाक पूरी तरह पाप है। मुस्लिम समुदाय का बड़ा तबका इसे पाप और अस्वीकार्य मानता है।

अन्नाद्रमुक के अनवर रजा ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने पहले के विधेयक में बड़े संशोधन नहीं किए और संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ विधेयक लेकर आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक सांप्रदायिक सद्भाव और संविधान के खिलाफ है।

विपक्षी सदस्यों द्वारा इस विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की मांग पर लोक सभा स्पीकर ने कहा कि यह महत्वपूर्ण विधेयक है और सदन को इस पर चर्चा करनी चाहिए।
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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