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मंगलवार, 7 अप्रैल 2020
 
 

जेएनयू हिंसा: क्या दोषियों को सजा मिलेगी?

सोमवार, 6 जनवरी, 2020  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
रविवार शाम को जेएनयू परिसर में नक़ाब लगाए 50 छात्रों ने होटल में घुसकर छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया जिसमें जेएनयू के कई छात्र और शिक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल छात्रों में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्षा भी शामिल हैं जिन्हें हेड इंजरी हुई है। जेएनयू छात्र संघ ने आरएसएस और बीजेपी के छात्र संगठन एबीवीपी पर छात्रों और शिक्षकों पर लाठी और रॉड से हमला करने का आरोप लगाया। हालांकि एबीवीपी ने आरोप से इनकार किया।

जेएनयू हिंसा के ख़िलाफ़ पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। जेएनयू हिंसा के ख़िलाफ़ चेन्नई में कैंडल मार्च निकला गया। युवक कांग्रेस ने जेएनयू में हुई हिंसा के विरोध में दिल्ली के इंडिया गेट पर मशाल जुलूस निकाला। जूलूस में कई कार्यकर्ता चेहरे पर मास्क लगाकर शामिल हुए।

झारखंड की राजधानी रांची में भी सोमवार को युवाओं और छात्रों ने जेएनयू में हुई हिंसा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर जमा हुए और जेएनयू छात्रों के प्रति समर्थन जाहिर किया। छात्रों ने अपने हाथों में तख्तियां और बैनर थामे हुए थे। विरोध प्रदर्शन का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने विरोध किया। इसे लेकर दोनों पक्षों के बीच हल्की झड़प भी हुई।

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि जब वो जेएनयू में पढ़ते थे तो उन्होंने वहाँ कोई 'टुकड़े टुकड़े' गैंग नहीं देखे थे।

दिल्ली पुलिस ने जेएनयू हिंसा मामले में ख़ुद पर उठ रहे सवालों की सफाई देते हुए सोमवार को बताया कि जेएनयू हिंसा मामले की जांच क्राइम ब्रांच करेगी।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता एम एस रंधावा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, "मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच ने अलग से टीमें बनाई हैं। पुलिस के अधिकारियों ने आज मौके का मुआयना किया। पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं।''

उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस ने तथ्य जुटाने के लिए ज्वाइंट सीपी शालिनी सिंह की अगुवाई में एक कमेटी बनाई है। उन्होंने बताया कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा कर रही है।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ने पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवालों को लेकर सफ़ाई देते हुए कहा कि पुलिस ने प्रोफेशनल तरीके से काम किया। उन्होंने ये भी बताया कि हमले में घायल हुए सभी 34 लोग अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं।

फ़िल्म अभिनेता अनिल कपूर ने जेएनयू कैंपस में हुई हिंसा की निंदा करते हुए कहा है कि जो कुछ हुआ वो बहुत परेशान करने वाला था। अनिल कपूर के मुताबिक वो 'पूरी रात इसके बारे में सोचते रहे और सो नहीं पाए।

दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी कैंपस में हिंसा के विरोध में सोमवार को मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया पर प्रदर्शन हुए।

कई प्रदर्शनकारी अपने हाथों में बैनर और तख्तियां थामे हुए थे। इन पर हिंसा के ख़िलाफ़ और संविधान और विश्वविद्यालयों को बचाने के नारे लिखे हुए थे। कई प्रदर्शनकारी दिल्ली पुलिस के कामकाज पर भी सवालिया निशान लगा रहे थे।

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की अध्यक्ष आइशी घोष ने यूनिवर्सिटी कैंपस में रविवार को हुई हिंसा के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) पर आरोप लगाए हैं।

आइशी को भी हमलें में चोटें आईं थीं। आइशी ने कहा, "कल का हमला आरएसएस और एबीवीपी के गुंडों द्वारा किया गया एक संगठित हमला था। पिछले 4-5 दिनों से कैंपस में कुछ आरएसएस से जुड़े प्रोफेसरों और एबीवीपी द्वारा हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा था।''

भारत के केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल ने कहा है कि जेएनयू मामले में दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी। पोखरियाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों को राजनीति का 'अड्डा' नहीं बनने दिया जाएगा।

जेएनयू में हुए हमले के विरोध में कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भी छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों में से एक मलिगे सिरीमाने ने कहा, "जेएनयू देशभर में कई संघर्षों के लिए प्रेरणा बना है। ऐसा सिर्फ़ इसलिए नहीं है कि ये एक आदर्श विश्वविद्यालय है। ऐसा इसलिए भी है कि यहां संघर्ष की भावना दिखती है। यहां के छात्रों ने कई जुल्म सहे हैं। पहले भी कुछ छात्र यूनियन के अध्यक्ष मारे गए हैं।''

मोदी सरकार में शामिल जनता दल (यूनाइटेड) ने एक बयान जारी कर जेएनयू कैंपस में हुए हमले की निंदा की है और मामले की सुप्रीम कोर्ट के जज से 'स्वतंत्र और निष्पक्ष' जांच कराने की मांग की है।

जेडीयू ने जेएनयू छात्रों के साथ एकजुटता भी जाहिर की है। जेडीयू के महासचिव और प्रवक्ता के सी त्यागी की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "जेएनयू कैंपस में गुंडों की ओर से हिंसात्मक गतिविधियों की जनता दल (यू ) कड़ी निंदा करता है।''

बयान में आगे कहा गया है, "जेएनयू की पहचान बहस, बातचीत और वैचारिक मतभेदों की रही है न कि ऐसी घटनाओं की। ये बहस में वैचारिक हार झेलने वालों की कायरताभरी कार्रवाई है।''

बयान में जेएनयू के कुलपति और दूसरे अधिकारियों की 'मूक दर्शक' बने रहने के लिए निंदा की गई है और उन्हें हटाने की मांग की गई है। जेडीयू ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र जेएनयू हिंसा के विरोध में विश्वविद्यालय के उत्तरी गेट के सामने एकत्र हुए।

जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन ने यूनिवर्सिटी कैंपस में छात्रों और शिक्षकों पर हुए हमले को लेकर कुलपति को हटाने की मांग की है।

एसोसिएशन ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा, "कुलपति ने शिक्षा और सीखने की प्रक्रिया का मजाक बनाया है।''

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी कैंपस में हुई हिंसा के विरोध में सोमवार को यूनिवर्सिटी के शिक्षक भी विरोध में उतरे। शिक्षकों ने हाथ में तख्तियां थामी हुईं थीं। इनमें फ़ीस बढ़ाने और हिंसा के विरोध में बातें लिखी हुईं थीं।

कांग्रेस ने जेएनयू में हुए हमले के दोषियों को 24 घंटे के अंदर गिरफ़्तार करने की मांग उठाई है।

कांग्रेस नेता पी चिंदबरम ने कहा, "ये घटना शायद इस बात की सबसे पुख़्ता सबूत है कि हम तेज़ी के साथ अराजक राज्य में तब्दील हो रहे हैं। ये राष्ट्रीय राजधानी में भारत के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय में केंद्र सरकार, गृहमंत्री, एलजी और पुलिस कमिश्नर की देखरेख में हुआ।''

चिदंबरम ने कहा, "हम मांग करते हैं कि हिंसा की साजिश रचने वाले पहचाने जाएं और 24 घंटे के अंदर गिरफ़्तार किए जाएं और उन्हें क़ानून के दायरे में लाया जाए। हम ये भी मांग करते हैं कि अधिकारियों की भी जवाबदेही तय हो और तुरंत कार्रवाई की जाए।''

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जेएनयू में छात्रों पर हुए हमले को 'सदमे में डालने वाला' बताते हुए दिल्ली पुलिस के कामकाज पर सवाल उठाए हैं।

एमनेस्टी इंटरनेशनल की भारत इकाई के एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर अविनाश कुमार ने एक बयान जारी कर कहा है, "जेएनयू कैंपस में छात्रों पर हुई हिंसा सदमे में डालने वाली है। दिल्ली पुलिस के लिए, ऐसा हिंसक हमला बर्दाश्त करना और भी बुरा है। ये अभिव्यक्ति की आज़ादी और शांतिपूर्वक तरीके से इकट्ठा होने के अधिकार के प्रति शर्मनाक उदासीनता दिखाता है।''

बेंगलुरु से वरिष्ठ पत्रकार इमरान क़ुरैशी ने बताया कि वहाँ टाउन हॉल में नागरिक संशोधन कानून के ख़िलाफ़ धरने के दौरान एक रिटायर्ड प्रोफ़ेसर और जेएनयू के एक पूर्व छात्र भी शामिल हुए।

71वर्षीय प्रोफ़ेसर टी वेंकटेश मूर्ति ने हिंसा पर दुःख जताते हुए कहा, "हमारे समय छात्राएँ कैंपस में देर रात तक घूम सकती थींं। कल रात जो हुआ वैसी घटना कभी नहीं हुई जब छात्रों को होस्टलों में बर्बरता से पीटा गया।''
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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