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शनिवार, 30 मई 2020
 
 

वित्त मंत्री ने प्रवासी मजदूरों और किसानों के लिए क्या घोषणाएँ की?

वृहस्पतिवार, 14 मई, 2020  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
भारत की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि अगले दो महीनों तक सभी प्रवासी मज़दूरों को मुफ़्त अनाज दिया जाएगा।

वित्त मंत्री ने बताया कि इस योजना के दायरे में वो मज़दूर भी आएंगे जो खाद्य सुरक्षा क़ानून के दायरे में नहीं आते, इस योजना का फ़ायदा उन मज़दूरों को भी मिलेगा जिनके पास राशन कार्ड नहीं है।

वित्त मंत्री ने कहा, ''ऐसे आठ करोड़ प्रवासी मज़दूरों के लिए 3500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अगले दो महीनों तक हर प्रवासी मज़दूर परिवार को पांच किलो गेहूं या चावल और एक किलो चना मिलेगा। इसे लागू कराने की ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों की है।''

''वन नेशन, वन राशन कार्ड के ज़रिए मज़दूर चाहे देश के किसी भी कोने में हों, वहां राशन डिपो से अपने हिस्से का अनाज ले सकते हैं। इसका फ़ायदा उन सभी प्रवासी मज़दूरों को मिल पाएगा जो रोज़गार के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं।''

वित्त मंत्री ने कहा कि प्रवासी मज़दूरों और शहरी ग़रीबों को कम कीमत पर किराए के मकान मिल सके इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इसका इंतज़ाम किया जाएगा, राज्य सरकारें और उद्योगपति भी इसमें अपना योगदान करेंगे।

इसके अलावा वित्त मंत्री ने और भी बहुत सारी घोषणाएं की जो इस प्रकार हैं।

- नाबार्ड (नेशनल बैंक फ़ॉर एग्रीकल्चर एंड रुरल डेवलेपमेंट) ने ग्रामीण और सहकारी बैंकों को 29,500 करोड़ रुपये की मदद दी है। किसान इन बैंकों से लोन ले सकेंगे।
- 25 लाख किसानों को क्रेडिट कार्ड दिए गए हैं। जिन किसानों के पास कार्ड नहीं है, उन्हें भी क़र्ज़ मिलेगा। 2.5 करोड़ किसानों और पशुपालकों को भी क्रेडिट कार्ड दिए जायेंगे।
- केंद्र सरकार अपने ख़र्चे पर शहरों में रहने वाले बेघर लोगों को तीन वक़्त का खाना दे रही है।
- असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले सिर्फ़ 30 फ़ीसदी मज़दूर ही न्यूनतम वेतन का फ़ायदा उठा पाते हैं। पूरे देश में एक जैसा न्यूनतम वेतन लागू किया जाएगा ताकि क्षेत्रीय असमानता दूर हो। इसे क़ानूनी रूप दिया जाएगा।
- मज़दूरों को अपॉइंटमेंट लेटर दिया जाएगा। साल में एक बार उनका हेल्थ चेकअप अनिवार्य होगा और ख़तरनाक परिस्थितियों में काम करने वाले मज़दूरों का सामाजिक सुरक्षा स्कीमों के ज़रिए ध्यान दिया जाएगा।
- कोरोना संकट के दौरान 12 हज़ार स्वयंसेवी समूहों ने तीन करोड़ से ज़्यादा मास्क और 1.2 लाख लीटर सैनिटाइज़र बनाया। पिछले दो महीनों में शहरी ग़रीबों की मदद के लिए 7,200 नए स्वयंसेवी समूह बनाए गए।
- 50 लाख रेहड़ी-पटरी वालों के लिए पांच हज़ार करोड़ रुपये की सहयोग राशि का ऐलान किया जाता है। इससे हर व्यक्ति को 10 हज़ार रुपये तक की लोन सुविधा मिलेगी। सरकार इसे एक महीने के भीतर लॉन्च कर देगी।

भारत की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि वो नौ क़दमों का ऐलान करेंगी जिनमें तीन प्रवासी मज़दूरों, एक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और अपना रोज़गार करने वाले लोगों, दो छोटे किसानों और एक हाउसिंग के लिए है।

वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले दो महीनों में कृषि क्षेत्र के लिए 86,000 करोड़ के बराबर राशि के 63 लाख लोन मंज़ूर किए गए। मार्च-अप्रैल का महीना खेती और अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, इसलिए सरकार ने ये फ़ैसला लिया।

वित्त मंत्री ने कहा, ''इन दिनों प्रवासी मज़दूरों और शहरी ग़रीबों की बहुत चर्चा हुई है। मोदी सरकार ने शहरी ग़रीबों को 11 हज़ार करोड़ रुपये की मदद दी है। ये मदद एसडीआरएफ़ (स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फ़ंड) के ज़रिए दी गई है।''

वित्त मंत्री ने कहा, ''जो प्रवासी मज़दूर अपने राज्यों में वापस गए हैं उनकी मदद करने के लिए 10 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च किए जा चुके हैं। वापस लौटे 40-50 फ़ीसदी मज़दूरों ने मनरेगा में काम करने के लिए नामांकन कराया है जो पिछले साल मई महीने के मुक़ाबले काफ़ी ज़्यादा है। मजदूरों की दिहाड़ी 182 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 202 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है।''
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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