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वृहस्पतिवार, 1 अक्टूबर 2020
 
 

नीतीश को उनके घर में मात देने की रणनीति!

बुधवार, 26 अगस्त, 2020  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद को राजद के मुकाबले कुछ ज़्यादा ही सियासी रणनीतिकार मानते हैं। जहां एक तरफ नीतीश कुमार के सिपहसालार नए-नए तरीके अपनाकर लालू खेमे को मात देने में जुटे हुए हैं वहीं राजद के सियासी बाज़ीगर भी अपनी चाल समय-समय पर चल रहे हैं।

ख़बर है कि राजद की अगुवाई वाले महागठबन्धन की मंशा है कि सबसे पहले नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में ही उन्हें मात देने की रणनीति तैयार की जाये।

सत्ता में होने के कारण विभिन्न जाति, बिरादरी और धर्म के लोग सत्ताधारी पार्टी से अपनी नजदीकी ज़ाहिर तो कर रहे हैं लेकिन सच ये है कि नीतीश के अपने घर अर्थात नालंदा में भी लोगों में काफी नाराज़गी साफ दिखाई दे रही है सत्ता के विरूद्ध।

जिले की बिहार शरीफ विधान सभा क्षेत्र में नीतीश कुमार अपने चहेते की जीत सुनिश्चित करने हेतु कई बिंदुओं पर चिंतन कर रहे हैं और उक्त विधान सभा को हर कीमत पर जीतना चाहते हैं।

जबकि राजद और महागठबन्धन बिहार शरीफ विधान सभा क्षेत्र में अपनी जीत को नीतीश कुमार के घर में उनको शिकस्त देना मानता है ऐसे में इस विधान सभा सीट की अहमियत स्वभाविक है।

नालंदा जिला में कई वर्षों से लालू यादव के नाम की रट लगाने वाले राजद के जिला अध्यक्ष रहे हुमायूं अख्तर तारिक इस बार राजद के भावी उमीदवार बताए जाते हैं।

नीतीश कुमार ने हमेशा बिहार शरीफ के मुस्लिम बुद्धिजीवी वर्ग के माध्यम से खुद को सेक्यूलर साबित करने की कोशिश की है ऐसे में हुमायूं अख्तर तारिक को उम्मीदवार बनाकर राजद नीतीश के भ्रम को तोड़ना अवश्य चाहेगी।

हमेशा बिहार शरीफ में चुनावी दंगल का रंग उन्मादी हो जाता है जिसमें नुकसान राजद का ही होता है लेकिन हुमायूं अख्तर तारिक सर्व समाज में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं जिससे नीतीश कुमार के परंपरागत वोटरों में सेंध लगाने में इस बार राजद सफल हो सकती है।

ऐसे में हुमायूं को उम्मीदवार बनाकर राजद अपने लालटेन की लौ से कई तरह के तीरों के धार को कुंद कर सकती है।

बिहार शरीफ विधान सभा क्षेत्र में जीत सुनिश्चित करने के लिए नीतीश कुमार खुद ही चौकन्ना रहेंगे वहीं उनके करीबी लोग भी कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

राजद और महागठबन्धन खेमे में तेजस्वी यादव के साथ-साथ मनोज झा, फैसल अली, अशफाक करीम, शकील ज़मान अंसारी जैसे कई सियासी समझ रखने वाले नेता इस मुहिम में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

अब देखना है कि बिहार शरीफ विधान सभा के लोग सत्ता और विपक्ष दोनों उम्मीदवारों का आंकलन किस तरह करेंगे?

साथ ही साथ पूंजी से सत्ता और फिर सत्ता से पूंजी के खेल के इस ख़तरनाक सियासी दौर में दोनों खेमा उमीदवार के चयन में धनबल या बाहुबल को प्राथमिकता देते हैं या फिर हुमायूं अख्तर तारिक जैसे ज़मीनी कार्यकर्ता को। यह आने वाला वक़्त ही बताएगा!
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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