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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020
 
 

हाथरस गैंग रेप: क्या पुलिस कप्पन की गिरफ़्तारी के ज़रिए पत्रकारों को धमकाने की कोशिश कर रही है?

वृहस्पतिवार, 8 अक्टूबर, 2020  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
भारत में मलयालम समाचार एजेंसी अज़िमुख्म के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन की गिरफ़्तारी को लेकर 'केरल यूनियन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स' ने सुप्रीम कोर्ट में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। याचिका में उनके गिरफ़्तारी को ग़ैर क़ानूनी बताते हुए सिद्दीक़ कप्पन को फ़ौरन सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करने की गुहार लगाई गयी है।

सिद्दीक़ कप्पन को मथुरा पुलिस ने गिरफ़्तार किया है।

याचिका दायर करने वाले वकील विलिस मैथ्यू ने बीबीसी से बात करते हुए कहा है कि उनकी याचिका पर अदालत में शुक्रवार को सुनवाई होगी। उन्होंने अपनी याचिका में लिखा है कि स्वतंत्र मीडिया लोकतंत्र की सांस है और पुलिस का कप्पन को इस तरह गिरफ़्तार करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

दरअसल, कप्पन को पाँच अक्टूबर को मथुरा के टोल प्लाज़ा के पास गिरफ़्तार किया गया जब वो तीन अन्य लोगों के साथ उत्तर प्रदेश के हाथरस में उस गाँव की तरफ़ जा रहे थे जहां एक 19 वर्षीया दलित लड़की से कथित रूप से गैंगरेप किया गया था और जिसकी बाद में अस्पताल में मौत हो गई थी।

पीएफ़आई से कनेक्शन है- मथुरा पुलिस

मथुरा के एसपी गौरव ग्रोवर ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि कप्पन के साथ जिन तीन अन्य लोगों की गिरफ़्तारी हुई है, उनके संबंध कट्टरपंथी संगठन पापुलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) और उसकी छात्र इकाई कैंपस फ्रंट ऑफ़ इंडिया से है।

गिरफ़्तार किए गए लोगों की पहचान अतीक़-उर रहमान, मसूद अहमद और आलम के रूप में की गयी है जो पीएफ़आई के सक्रिय सदस्य बताये जाते हैं। पुलिस का कहना है कि रहमान मुज़फ़्फ़रनगर के रहने वाले हैं जबकि मसूद बहराईच और आलम रामपुर के रहने वाले हैं।

कहा जा रहा है कि आलम उस गाड़ी के ड्राईवर हैं जिस गाड़ी से सभी को मथुरा टोल प्लाज़ा के पास से गिरफ़्तार किया गया।

मथुरा के वरिष्ठ एसएसपी कहते हैं कि अभी प्राथमिकी दर्ज हुई है और पुलिस ने जाँच शुरू कर दिया है, ऐसे में कोई जानकरी अभी नहीं दी जा सकती।

वैसे जो प्राथमिकी मथुरा के पुलिस स्टेशन में दर्ज की गयी है उसमें कहा गया है कि चारों को षड्यंत्र रचने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है।

इन पर ग़ैर-क़ूनूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन अधिनियम (यूएपीए) की धारा 17 और 14 (आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने), भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए (देशद्रोह) के अलावा 153-ए और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के ख़िलाफ़ धारा 295-ए के साथ-साथ आईटी एक्ट की धाराएं भी लगाई गयी हैं।

पुलिस की एफ़आईआर कहती है कि गिरफ़्तार किये गए लोग हाथरस की घटना की आड़ में धन इकठ्ठा करने का काम कर रहे थे और उनके पास से पोस्टर और कई दस्तावेज़ बरामद किये गए हैं।

एफ़आईआर में कहा गया है कि सामाजिक माहौल को बिगड़ने के लिए एक वेबसाइट भी बनायी गयी थी।

मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर कहते हैं कि गिरफ़्तार किये गए लोगों के बारे में अलग-अलग जाँच चल रही है। जो सामग्री और दस्तावेज़ उनके पास से बरामद किये गए हैं उनकी जाँच एक विशेष टीम कर रही है। ये लोग कौन हैं, इनका क्या काम है और इनकी किस तरह की गतिविधियाँ रहीं हैं? उसके बारे में पता लगाया जा रहा है।

क्या पुलिस कप्पन की गिरफ़्तारी के ज़रिए पत्रकारों को धमकाने की कोशिश कर रही है?

कप्पन की गिरफ़्तारी को लेकर प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया और केरल यूनियन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स की तरफ़ से अलग-अलग बयान जारी कर घटना की निंदा करते हुए उनकी फ़ौरन रिहाई की माँग की गयी है।

केरल यूनियन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स की दिल्ली इकाई की अध्यक्ष मिजी जोज़े पी. ने बयान जारी कर कहा है कि कप्पन एक पत्रकार के नाते अपना काम कर रहे थे और इसलिए तथ्यों को जानने के लिए वो हाथरस जा रहे थे। उनका आरोप है कि कप्पन को गिरफ़्तार कर घटना की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को धमकाने की कोशिश की जा रही है।

वहीं पीएफ़आई के महासचिव अनीस अहमद ने एक बयान जारी कर उत्तर प्रदेश की सरकार को चुनौती दी है कि वो उनके संगठन के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों के सुबूतों को सार्वजनिक करे।

वह कहते हैं, ''आरोप लगाए गए हैं कि सौ करोड़ रूपए इकठ्ठा किये गए ताकि समाज में गड़बड़ी फैलाई जा सके। हम उत्तर प्रदेश की सरकार से माँग करते हैं कि वो सार्वजनिक तौर पर इस बात का ख़ुलासा करें कि किस बैंक से ये रक़म दी गयी या जमा की गयी।''

उन्होंने स्वीकार किया कि कप्पन के अलावा गिरफ़्तार किये गए बाक़ी के तीन लोग उनके संगठन से हैं। वह ये भी कहते हैं कि उनका संगठन प्रतिबंधित नहीं है।

अनीस अहमद ने आरोप लगाते हुए कहा कि पहले भी जब नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहे थे, तब उत्तर प्रदेश की सरकार उनके संगठन को बदनाम करने की कोशिश कर चुकी है। दिल्ली पुलिस ने भी ऐसा ही किया।

अहमद कहते हैं कि हाथरस में जो हुआ वो एक जघन्य कांड है जिसका विरोध उनका संगठन करता रहेगा।

कप्पन सहित गिरफ़्तार किये गए सभी अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

मथुरा में कप्पन की वकील दीपा चतुर्वेदी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि वो कल तक का इंतज़ार कर रहीं हैं जब बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी।

वह कहती हैं, ''सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद हम यूएपीए की अदालत में दूसरी याचिका दायर करेंगे।''
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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