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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020
 
 

अज़रबैजान-आर्मीनिया युद्ध विराम समझौता एक रात भी क्यों नहीं टिक सका?

मंगलवार, 13 अक्टूबर, 2020  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
अज़रबैजान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे स्टपनेकर्ट शहर में लोगों ने दस और ग्यारह अक्टूबर की दरमियानी रात अपने घरों के तहख़ानों में गुजारी।

नागोर्नो-काराबाख पर हो रही लड़ाई को लेकर शनिवार को अज़रबैजान और आर्मीनिया के बीच रूस की मध्यस्थता में युद्ध विराम के जिस समझौते की घोषणा हुई थी, वो एक दिन भी ठीक से बरकरार नहीं रखा जा सका।

अज़रबैजान ने आर्मीनिया पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाया। उसने कहा कि आर्मीनिया की तरफ़ से गांजा शहर पर गोलीबारी की गई और शहर की एक रिहाइशी इमारत को तबाह कर दिया गया। इस घटना में कम से कम नौ लोग मारे गए।

आर्मीनिया की मिलिट्री ने इस बात से इनकार किया कि उनकी तरफ़ से गांजा शहर पर कोई हमला किया गया था।

कई दिनों के बाद शनिवार की दोपहर ऐसा लगा जब स्टपनेकर्ट शहर में हवाई हमले की चेतावनी वाले सायरन नहीं सुनाई नहीं दिए।

शहर के बहुत से लोग जो पिछले दो हफ़्तों से बेसमेंट में रह रहे थे, वे बाहर निकले और अपने अपार्टमेंट्स में जा पाए।

हालांकि शनिवार को स्टपनेकर्ट शहर में सन्नाटा पसरा था, लेकिन दक्षिणी मोर्चे पर अज़रबैजान के हादरुत और आर्मीनिया के कपान शहर के गांवों में सुबह से ही गोलीबारी सुनी जा रही थी।

संघर्ष विराम की घोषणा के बावजूद कई बुजुर्ग महिलाएं बेसमेंट में थीं। वे अपने अपार्टमेंट्स में जाने से अभी भी डर रही थीं।

बेसमेंट में रह रहे लोगों ने बताया कि कुछ दिनों पहले हवाई हमले में पावर प्लांट बर्बाद हो गया था। उसके अगले दिन एक पेंट शॉप पर बम गिरा और वो इमारत खाक़ हो गई।

कुछ लोगों का कहना है कि शांति समझौता सिर्फ दो दिनों तक कायम रहा है। स्टपनेकर्ट के दूसरे लोगों ने कहा कि 72 घंटे तक शांति रही थी।

लेकिन रात में नार्गोनो-काराबाख में फिर से गोलीबार हुई और वहाँ रहने वालों को तहखानों में जाकर शरण लेनी पड़ी।

आर्मीनिया ने अज़रबैजान पर युद्ध विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है लेकिन अज़रबैजान ने कहा है कि आर्मीनियाई फ़ौज ने गांजा पर हमला किया था इसलिए उसने शांति समझौते का उल्लंघन किया है।

नार्गोनो-काराबाख क्षेत्र के विदेश मंत्रालय से जब बीबीसी संवाददाता ने पूछा कि क्या नए सिरे से गोलीबारी का मतलब है कि शांति समझौता पूरी तरह से ख़त्म हो चुका है और फिर से दोनों देशों में जंग शुरू हो गई है।

इस पर विदेश मंत्रालय का जवाब था, ''यह कहना मुश्किल है लेकिन कम से कम यह जरूर साफ है कि जो हो रहा है वो युद्धविराम को लेकर हुई संधि का पालन तो कतई नहीं है। हम देखेंगे कि इस बारे वो क्या करते हैं? हमारी किस्मत अच्छी नहीं है। यह तो पक्का है।''
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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