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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020
 
 

हाथरस मामला: रात के अंधेरे में लड़की का अंतिम संस्कार करना मानवाधिकार का उल्लंघन है - इलाहाबाद हाईकोर्ट

मंगलवार, 13 अक्टूबर, 2020  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
भारत के प्रान्त उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक 19 वर्षीया दलित लड़की के साथ कथित गैंगरेप और फिर उनकी मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार पर सख़्त टिप्पणी की है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि रात के अंधेरे में लड़की का अंतिम संस्कार करना लड़की और उनके परिवार दोनों के मानवाधिकार का उल्लंघन है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को निर्देश दिए हैं कि हाथरस जैसे हालात में शवों का अंतिम संस्कार किस तरह किया जाए, इसको लेकर वो एक नियम बनाएं।

14 सितंबर 2020 को हाथरस में एक दलित लड़की के साथ पहले चार राजपूत युवकों ने कथित तौर पर गैंगरेप किया और फिर लड़की को इतनी बुरी तरह से मारा कि बाद में लड़की की मौत हो गई।

ज़ख़्मी हालत में लड़की को अलीगढ़ अस्पताल ले जाया गया। जब लड़की की हालात और बिगड़ने लगी तो उन्हें दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल लाया गया।

लेकिन लड़की की जान नहीं बचाई जा सकी और 29 सितंबर 2020 को लड़की की मौत हो गई।

हाथरस प्रशासन ने लड़की के शव को अपने क़ब्ज़े में लेकर देर रात गांव के बाहर उनका अंतिम संस्कार कर दिया।

लड़की के परिवार वालों का कहना है कि पुलिस ने उन्हें अपनी बेटी की शक्ल भी आख़िरी बार नहीं देखने दी और उन लोगों को घर में बंद करके ज़बरदस्ती अंतिम संस्कार कर दिया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का स्वत: संज्ञान

पुलिस का कहना है कि उन्होंने क़ानून-व्यवस्था के बिगड़ने की आशंका को देखते हुए रात में ही अंतिम संस्कार कर दिया।

मीडिया में यह ख़बर आने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और यूपी के वरिष्ठ अधिकारियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के सामने पेश होने को कहा।

12 अक्टूबर 2020 को उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी और मृत लड़की के परिवार के पाँच लोग इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश हुए।

उत्तर प्रदेश के डीजीपी, अपर मुख्य सचिव (गृह) और हाथरस ज़िला प्रशासन के सभी वरिष्ठ अफ़सरों को तलब किया गया था।

सोमवार को जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस राजन रॉय की बेंच ने उन लोगों के बयान दर्ज किए।

पीड़ित परिवार की वकील सीमा कुशवाहा के अनुसार सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों से पूछा, ''अगर लड़की आपके परिवार की होती तो भी क्या आप इसी तरह करते?''

हाथरस के ज़िलाधिकारी प्रवीण कुमार ने अदालत को बताया कि रात के ढाई बजे अंतिम संस्कार करने का फ़ैसला उनका था और क़ानून-व्यवस्था के बिगड़ने की आशंका के तहत उन्होंने ऐसा किया था। ज़िलाधिकारी ने यह भी कहा कि ऐसा करने के लिए उन पर राज्य सरकार का कोई दबाव नहीं था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़िलाधिकारी से पूछा कि मरने वाली लड़की अगर किसी अमीर आदमी की बेटी होती तो क्या आप इसी तरह जला देते?

सुनवाई के दौरान मीडिया को आने की इजाज़त नहीं थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट को यह तय करना था कि क्या रात के अंधेरे में परिवार की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ इस तरह से अंतिम संस्कार करना उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है और क्या प्रशासन ने लड़की की ग़रीबी और जाति के आधार पर भेदभाव किया?

इलाहाबाद हाईकोर्ट को यह भी तय करना था कि क्या प्रशासन ने अंतिम संस्कार करते समय हिंदू धर्म के अनुसार सभी रीति रिवाजों का पालन किया था या नहीं?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आख़िरकार देर रात अंतिम संस्कार को लड़की और उनके परिवार के मानवाधिकारों का उल्लंघन माना है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले का हवाला देते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 व्यक्ति को न केवल जीने का अधिकार देता है, बल्कि मौत के बाद शव की गरिमा बनाए रखने और सम्मानजनक तरीक़े से अंतिम संस्कार का अधिकार भी देता है।

पीड़ित परिवार की वकील सीमा कुशवाहा के अनुसार, परिवार ने माँग की है कि इस मामले की सुनवाई उत्तर प्रदेश के बाहर की जाए। परिवार ने यह भी माँग की है कि जाँच पूरी होने तक सभी तथ्य सार्वजनिक नहीं किए जाएं और जब तक जाँच चले, परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो नवंबर को अगली सुनवाई की तारीख़ दी है।

उत्तर प्रदेश सरकार के एडीशनल एडवोकेट जनरल वी के शाही भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि दो नवंबर को एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) और स्पेशल सेक्रेटरी होम डिपार्टमेंट, ये दो लोग आएंगे। बाक़ी किसी अधिकारी को पेश होने के लिए अदालत ने नहीं कहा है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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