• Name
  • Email
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020
 
 

अफ़ग़ानिस्तानः तालिबान ने शांतिवार्ता के बीच हेलमंद पर बड़ा हमला किया, लड़ाई शुरू

बुधवार, 14 अक्टूबर, 2020  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद प्रांत में सरकारी सैन्यबलों और तालिबान लड़ाकों के बीच भारी लड़ाई चल रही है। इसके बाद वहाँ से हज़ारों परिवारों को अपने घर छोड़ कर भागना पड़ रहा है।

12 अक्टूबर 2020 को अफगानिस्तान सरकार और तालिबान लड़ाकों के बीच फिर से लड़ाई शुरू हो गई। 14 अक्टूबर 2020 इस हिंसक संघर्ष का तीसरा दिन है। अफ़गान सैनिक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हेलमंद प्रांत की राजधानी लश्कर गाह को तालिबान के हमले से बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

पिछले ही महीने अफ़ग़ानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच शांति वार्ता शुरू हुई थी। उसके बाद से दोनों पक्षों के बीच पहली बार बड़ी लड़ाई छिड़ गई है।

अफ़ग़ान सैन्यबल तालिबान के हमले का जवाब दे रहे हैं और अमरीकी हवाई हमले उनकी जवाबी कार्रवाई में मदद कर रहे हैं।

इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान में नेटो के प्रमुख अमरीकी जनरल स्कॉट मिलर ने शांति वार्ता को नज़रअंदाज़ करने और फ़रवरी में हुए समझौते का उल्लंघन करने के लिए तालिबान की निंदा की थी।

भारी हिंसा के बीच हेलमंद और पड़ोसी कांधार प्रांत में बिजली की आपूर्ति बाधित है। तालिबान ने यहाँ सोमवार को एक पावर सब-स्टेशन पर हमला कर दिया था।

कई टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क भी ठप्प हो गए हैं। अनुमान है कि अब तक करीब 5,000 परिवारों या लगभग 35,000 लोगों को अपने घरों से भागना पड़ा है। इनमें से कई लोगों के पड़ोस में शरण लेने की ख़बर है।

एक परिवार ने बीबीसी संवाददाता लिज़ डुसेट को बताया कि उन्होंने जो कपड़े पहने हुए थे। उन्हीं में लश्कर गाह स्थित अपना घर छोड़ना पड़ा। परिवार को ये तक नहीं मालूम था कि कि उन्हें सोने के लिए भी कोई सुरक्षित जगह मिलेगी या नहीं।

कुछ अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें डर है कि कहीं वो भूख से मर जाएँ। स्थानीय अस्पताल ने बताया कि वहां दर्जनों घायल लोगों को भर्ती कराया गया है।

बीबीसी की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संवाददाता लिज़ डुसेट के मुताबिक तालिबान का हमला और एक और मानवीय संकट- अफ़गानिस्तान के लोगों को ऐतिहासिक शांति वार्ता से कम से कम ये उम्मीद तो नहीं थी।

तालिबान ने अफ़गानिस्तान के दक्षिण में स्थित और रणनीतिक रूप से अहम हेलमंद प्रांत में हमला करके एक बार फिर अफ़गान सैनिकों और अमरीकी प्रतिबद्धता की परीक्षा लेने की कोशिश की है।

ध्यान देने वाली बात ये है कि अफ़ग़ानिस्तान ने इससे कुछ महीने पहले ही अमरीका के साथ समझौता किया था।

लेकिन अब एक तरफ़ तलिबान का हमला जारी है और दूसरी तरफ़ अमरीका के युद्धक विमानों का तालिबान पर हमला भी जारी है। यह साल का वो वक़्त है जब सर्दियां शुरू होने वाली हैं और जब युद्ध के आख़िरी दौर में हिंसा तेज़ हो जाती है।

लेकिन इस साल ये हमले करके और अपने लड़ाकों का हौसला बढ़ाकर तालिबान शांति वार्ता में अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है। तालिबान का कहना है कि वो उन्हीं इलाकों को वापस ले रहा है जो पहले से उसके क़ब्ज़े में थे।

इन सबके बीच तालिबान की आक्रामक कार्रवाई शांतिवार्ता को लेकर उसकी प्रतिबद्धता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है।

अफ़ग़ान-तालिबान शांति वार्ता और तालिबान-अमरीका का समझौता

तालिबान का यह हमला इसलिए भी ज़्यादा चिंताजनक है क्योंकि पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रमों को देखकर शांति की थोड़ी ही सही मगर उम्मीद ज़रूर जताई जा रही थी।

इसी साल फ़रवरी में 18 वर्षों के ख़ूनखराबे और युद्ध के बाद अमरीका और तालिबान ने शांति बहाली के लिए समझौता किया था।

इस समझौते के तहत अमरीका और नेटो सहयोगियों ने यह वादा किया था कि अगर तालिबान के लड़ाके समझौते का पालन करते हैं तो वो 14 महीनों के भीतर अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिक वापस बुला लेंगे।

समझौते के तहत तालिबान अपने नियंत्रण वाले इलाकों में अल-क़ायदा या किसी अन्य चरमपंथी समूह को न पहुंचने देने पर भी सहमत हुआ था।

इधर, कई महीनों की देरी के बाद आख़िरकार क़तर में अफ़ग़ानिस्तान-तालिबान शांतिवार्ता की शुरुआत हुई थी।

इस ऐतिहासिक शांतिवार्ता से बरसों से युद्ध के साये में घिरे अफ़ग़ानिस्तान के लिए कई उम्मीदें जताई जा रही थीं। लेकिन अब हेलमंद में जारी हमलों के बाद ये उम्मीदें भी धुंधली पड़ गई हैं।
 
 
 
 
 
 
 
 
 

खास खबरें

 
किसी भी देश की जीडीपी इस बात पर निर्भर करती है कि लोगों और सरकार के पास पैसा ख़र्च करने के लिए कितना है।...
तुर्की ने पिछले कुछ सालों में अपनी सुरक्षा के लिए काफ़ी ख़र्च किया है और कर रहा है। तुर्की में...
 

खेल

 

देश

 
भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल रामदास समेत भारत के क़रीब 120 सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने भारत...
 
भारत में सुप्रीम कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी की टीआरपी मामले की जाँच सीबीआई से करवाने की आग्रह वाली याचिका...