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रविवार, 17 जनवरी 2021
 
 

हिंदू संत की समाधि फिर से बनाई जाए और तोड़ने वाले गैंग से पैसा वसूला जाए: पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट

मंगलवार, 5 जनवरी, 2021  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ़्ते के अंदर हिंदू संत की समाधि का पुनर्निमाण शुरू करने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत की सरकार को कोर्ट में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

हाल ही में ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के करक ज़िले में हिंदू संत श्री परम हंस जी महाराज की ऐतिहासिक समाधि को स्थानीय लोगों की एक नाराज़ भीड़ ने ढहा दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए 05 जनवरी 2021 को सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुलज़ार अहमद की अगुवाई में तीन सदस्यों की बेंच ने मामले की सुनवाई की।

पुलिस आईजी सनाउल्लाह अब्बासी और ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के मुख्य सचिव डॉक्टर काज़ीम नियाज़ सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद थे।

सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ

पुलिस के आईजी सनाउल्लाह अब्बासी ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में अब तक 92 पुलिस वालों को निलंबित कर दिया गया है। इसमें एसपी और डीएसपी भी शामिल हैं।

इस घटना को अंजाम देने वाले 109 लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है। घटना स्थल के पास एक सौ पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि एक मौलवी शरीफ़ ने भीड़ को हिंसा के लिए भड़काया।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस गुलज़ार अहमद ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को निलंबित करना ही काफ़ी नहीं है।

चीफ़ जस्टिस गुलज़ार अहमद ने कहा कि सरकार के आदेश का किसी भी स्थिति में पालन होना चाहिए। इस घटना ने पाकिस्तान की छवि को दुनिया भर में ख़राब किया है।

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ़्ते के अंदर समाधि को फिर से बनाए जाने का काम शुरू करने का आदेश दिया।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण कार्य के लिए पैसा मौलवी शरीफ़ और उनके 'गैंग' से वसूलने की बात कही।

ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह इवैक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के चेयरमैन ने कोर्ट को बताया कि समाधि की देखभाल हिंदू समुदाय की ओर से किया जाता है और चूंकि इस समाधि के आस-पास कोई हिंदू आबादी नहीं है इसलिए यह समाधि बंद पड़ा हुआ है और कोई बोर्ड स्टाफ़ यहाँ नियुक्त नहीं किया गया है।

हिंदुओं के लिए पवित्र स्थल

पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के चेयरमैन रमेश कुमार ने कोर्ट से कहा कि सैकड़ों हिंदू हर साल समाधि स्थल पर आते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि साल 1997 में मौलवी शरीफ़ ने यहाँ मंदिर तोड़ दिया था। तब हिंदू वहाँ अपने पैसे से मंदिर बनाना चाहते थे लेकिन बोर्ड ने मना कर दिया था।

अल्पसंख्यक आयोग के शोएब सुदले शिकायत करते हैं कि प्रॉपर्टी बोर्ड ने इसे बचाने के लिए जो करना चाहिए था वो नहीं किया।

उन्होंने कहा कि यह जगह हिंदुओं के लिए वैसे ही पवित्र स्थल है जैसे सिखों के लिए करतारपुर। ना कि सिर्फ़ यह बात है कि इस घटना से पाकिस्तान की बेइज़्ज़ती हुई है।

ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के मुख्य सचिव डॉक्टर काज़ीम नियाज़ ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया कि प्रांतीय सरकार मंदिर को फिर से बनाने का ख़र्च उठाएगी।

लेकिन चीफ़ जस्टिस ने उन्हें समाधि में आग लगाने वालों से पैसे वसूलने के लिए कहा है।

उन्होंने कहा कि वो ऐसा दोबारा करेंगे अगर जब तक कि उनकी जेब से पैसे नहीं निकलते हैं।

कार्रवाई और रिपोर्ट

चीफ़ जस्टिस गुलज़ार अहमद ने इवैक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के चेयरमैन को आदेश दिया है कि वो तत्काल घटना स्थल का दौरा करें और पुनर्निमाण का कार्य शुरू करवाएं।

चीफ़ जस्टिस गुलज़ार अहमद ने छोड़े गए वक़्फ़ संपत्तियों का पूरा लेखा-जोखा भी माँगा। इसके साथ ही निर्देश दिया कि वो बंद पड़े मंदिरों और खुले मंदिरों का विवरण भी दें।

ख़ाली पड़ी वक़्फ़ संपत्तियों पर जिन अधिकारियों ने अवैध क़ब्ज़ा कर रखा है, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का भी निर्देश चीफ़ जस्टिस ने दिया।

उन्होंने दो हफ़्तों के अंदर ये सारी रिपोर्टें बेंच के सामने पेश करने को कहा है।

इस मामले में अगली सुनवाई दो हफ़्तों के लिए स्थगित कर दी गई है। बाद में इस पर विस्तार से फ़ैसला आने की उम्मीद है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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