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शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021
 
 

छत्तीसगढ़ में माओवादियों का सबसे बड़ा हमला: क्या नक्सलियों के खिलाफ भारत की जीत निश्चित है?

सोमवार, 5 अप्रैल, 2021  परवेज़ अनवर, एमडी & सीईओ, आईबीटीएन ग्रुप
 
 


शनिवार, 03 अप्रैल 2021 को भारत के राज्य छत्तीसगढ़ के सुकमा-बीजापुर बॉर्डर के पास हुए नक्सली हमले में मारे गए जवानों को श्रद्धांजलि देने जगदलपुर पहुंचे भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि जिन लोगों ने जान गंवाई है उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।

अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नक्सली हमले पर जगदलपुर में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।

बैठक के बाद अमित शाह ने कहा, ''नक्सली हमले में जान गंवाने वाले जवानों को मैं सभी की तरफ से श्रद्धांजलि देता हूं उनका ये बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। आज हमने इस पर बैठक की। मैं देश को विश्वास दिलाता हूं कि लड़ाई रुकेगी नहीं बल्कि और गति के साथ आगे बढ़ेगी। अंत में नक्सलियों के खिलाफ हमारी जीत निश्चित है।''

वहीं भूपेश बघेल ने कहा कि हमले में नक्सलियों को भी भारी नुक़सान हुआ है। उन्होंने कहा कि ''हमें जानकारी मिली है कि नक्सलियों को चार ट्रैक्टर ट्रॉलियों में घायलों और मृतकों के शवों को ले जाना पड़ा है।''

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में शनिवार, 03 अप्रैल 2021 को माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए जवानों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है।  शनिवार, 03 अप्रैल 2021 को मुठभेड़ के बाद से एक जवान लापता है।

शनिवार, 03 अप्रैल 2021 को भारत के राज्य छत्तीसगढ़ के सुकमा-बीजापुर बॉर्डर के पास हुए नक्सली हमले में मारे गए जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जगदलपुर पहुंचे हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जान गंवाने वाले सुरक्षाकर्मियों को जगदलपुर में श्रद्धांजलि दी।

जवानों को श्रद्धांजलि देने के बाद अमित शाह ने मीडिया से कहा कि मैं शहीद जवानों के परिजनों और देश को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि जवानों का ख़ून व्यर्थ नहीं जाएगा।

उन्होंने कहा, ''नक्सलियों के ख़िलाफ़ हमारी लड़ाई और मज़बूती के साथ और तीव्रता के साथ चालू रहेगी।''

इससे पहले भूपेश बघेल ने कहा था कि नक्सलियों के प्रभाव क्षेत्र में कैम्प बनाने का काम तेज़ी से किया जाएगा।

शनिवार, 03 अप्रैल 2021 को बीजापुर में माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में 22 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी। वहीं 31 जवानों के घायल होने की ख़बर है।

छत्तीसगढ़: नक्सलवाद से प्रभावित राज्य, जहाँ पहले भी बड़े माओवादी हमले होते रहे हैं

छत्तीसगढ़ में नक्सल ऑपरेशन के डीजी अशोक जुनेजा ने रविवार, 4 अप्रैल 2021 की सुबह 22 जवानों के मारे जाने की पुष्टि की थी।

उन्होंने बताया कि शनिवार, 03 अप्रैल 2021 को बीजापुर में हुई मुठभेड़ में 22 जवान मारे गये और एक जवान अब भी लापता है।

इस मुठभेड़ को, पिछले कुछ सालों में छत्तीसगढ़ में माओवादियों का सबसे बड़ा हमला कहा जा रहा है।

छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से प्रभावित रहा है और पहले भी इस तरह के बड़े माओवादी हमले होते रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के कुछ बड़े माओवादी हमलों पर एक नज़र डालते हैं:

श्यामगिरी: 9 अप्रैल 2019

दंतेवाड़ा के लोकसभा चुनाव में मतदान से ठीक पहले नक्सलियों ने चुनाव प्रचार के लिए जा रहे भाजपा विधायक भीमा मंडावी की कार पर हमला किया था। माओवादियों के इस हमले में भीमा मंडावी के अलावा उनके चार सुरक्षाकर्मी भी मारे गये थे।

दुर्गपाल: 24 अप्रैल 2017

सुकमा ज़िले के दुर्रपाल के पास नक्सलियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 25 जवान उस समय मारे गये, जब वे सड़क निर्माण में सुरक्षा के बीच खाना खा रहे थे।

दरभा: 25 मई 2013

बस्तर के दरभा घाटी में हुए इस माओवादी हमले में आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा, कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 30 लोग मारे गए थे।

धोड़ाई: 29 जून 2010

नारायणपुर जिले के धोड़ाई में सीआरपीएफ के जवानों पर माओवादियों ने हमला किया। इस हमले में पुलिस के 27 जवान मारे गए।

दंतेवाड़ा: 17 मई 2010

एक यात्री बस में सवार होकर दंतेवाड़ा से सुकमा जा रहे सुरक्षाबल के जवानों पर माओवादियों ने बारूदी सुरंग लगा कर हमला किया था, जिसमें 12 विशेष पुलिस अधिकारी समेत 36 लोग मारे गए थे।

ताड़मेटला: 6 अप्रैल 2010

बस्तर के ताड़मेटला में सीआरपीएफ के जवान सर्चिंग के लिए निकले थे, जहां संदिग्ध माओवादियों ने बारुदी सुरंग लगा कर 76 जवानों को मार डाला था।

मदनवाड़ा: 12 जुलाई 2009

राजनांदगांव के मानपुर इलाके में माओवादियों के हमले की सूचना पाकर पहुंचे पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार चौबे समेत 29 पुलिसकर्मियों पर माओवादियों ने हमला बोला और उनकी हत्या कर दी।

उरपलमेटा: 9 जुलाई 2007

एर्राबोर के उरपलमेटा में सीआरपीएफ और ज़िला पुलिस का बल माओवादियों की तलाश करके वापस बेस कैंप लौट रहा था। इस दल पर माओवादियों ने हमला बोला, जिसमें 23 पुलिसकर्मी मारे गए।

रानीबोदली: 15 मार्च 2007

बीजापुर के रानीबोदली में पुलिस के एक कैंप पर आधी रात को माओवादियों ने हमला किया और भारी गोलीबारी की। इसके बाद कैंप को बाहर से आग लगा दिया। इस हमले में पुलिस के 55 जवान मारे गए।

छत्तीसगढ़: बीजापुर में नक्सलियों से लड़ते हुए मरने वाले जवानों की संख्या बढ़कर 22 हुई, एक अब भी लापता

बीजापुर में शनिवार, 03 अप्रैल 2021 को माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे जाने वाले जवानों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है।

नक्सल ऑपरेशन के डीजी अशोक जुनेजा ने बीबीसी से इसकी पुष्टि की है।

उन्होंने बताया, ''घटनास्थल पर पहुँची सुरक्षाबलों की टीम को आज (रविवार सुबह) 20 शव बरामद हुए। इसके अलावा ख़बर मिली है कि मुठभेड़ के बाद माओवादी अपने घायल साथियों को तीन ट्रैक्टर-ट्रालियों की मदद से ले गये थे। इस घटना की जाँच की जा रही है।''

बीबीसी ने मौक़े पर पहुँचे अलग-अलग स्रोतों से इस संबंध में बात की।  अशोक जुनेजा ने बताया कि एक किलोमीटर के दायरे में कई जगह जवानों के शव पड़े हुए थे, जिन्हें मौक़े पर पहुँची एसटीएफ की टीम ने बरामद किया।

कुछ बड़े माओवादी हमलों में से एक

पिछले कुछ सालों में छत्तीसगढ़ में यह माओवादियों का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है।

भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने माओवादियों से मुठभेड़ में जवानों की मौत पर दुख व्यक्त किया है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना के बाद एक ट्वीट में लिखा, ''छत्तीसगढ़ में माओवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए जवानों के परिवारों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं। वीर शहीदों की कुर्बानियों को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। घायलों के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूँ'।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि हमारे जवानों की शहादत बेकार नहीं जायेगी।

नक्सल ऑपरेशन पर निकले थे जवान

उन्होंने प्रेस से बातचीत में कहा कि माओवादियों और सुरक्षाबलों के बीच क़रीब चार घंटे तक मुठभेड़ चली। इस घटना में माओवादियों को भी काफ़ी क्षति पहुँची है। जिन सात जवानों को रायपुर शिफ़्ट किया गया था, वो अब ख़तरे से बाहर हैं। एक जवान अभी लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार, 02 अप्रैल 2021 को सुकमा और बीजापुर के अलग-अलग इलाक़ों से सीआरपीएफ़, डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड, स्पेशल टॉस्क फ़ोर्स और कोबरा बटालियन के 2059 जवान नक्सल ऑपरेशन के लिए निकले थे।

इनमें नरसापुर कैंप से 420 जवान, मिनपा कैंप से 483 जवान, उसुर कैंप से 200 जवान, पामेड़ कैंप से 195 जवान और तर्रेम कैंप से 760 जवान शामिल थे।

घायल जवान रायपुर के अस्पताल में

शनिवार, 03 अप्रैल 2021 को ऑपरेशन के बाद वापसी के दौरान तर्रेम थाना के सिगलेर से लगे जोन्नागुंड़ा के जंगल में माओवादियों ने सुरक्षाबलों पर हमला बोल दिया था।

मुठभेड़ में घायल हुए 37 जवानों को बीजापुर और रायपुर के अस्पतालों में भर्ती किया गया है।

इस बीच, छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने शनिवार, 03 अप्रैल 2021 की रात रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती किये गये जवानों से मुलाक़ात की थी।

 
 
 
 
 
 
 
 
 

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