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मंगलवार, 18 मई 2021
 
 

सीओवीआईडी संकट: वैज्ञानिकों की चेतावनी की मोदी सरकार ने उपेक्षा की - रॉयटर्स

शनिवार, 1 मई, 2021  आई बी टी एन खबर ब्यूरो
 
 
भारत में सरकार की ओर से गठित वैज्ञानिक सलाहकारों के एक फोरम ने मार्च 2021 की शुरुआत में भारतीय अधिकारियों को भारत में एक नए और ज़्यादा संक्रामक वेरिएंट के फैलने की चेतावनी दी थी। फोरम में शामिल पाँच वैज्ञानिकों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को ये जानकारी दी है।

चार वैज्ञानिकों ने कहा कि चेतावनी के बावजूद केंद्र की मोदी सरकार ने वायरस के फैलाव को रोकने के लिए बड़े स्तर पर प्रतिबंध नहीं लगाए।

बिना मास्क पहने लाखों लोगों ने धार्मिक आयोजन और राजनीतिक रैलियों में हिस्सा लिया, जो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी नेताओं ने की थीं।

इस बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन कृषि कानूनों और कृषि संबंधी बदलावों को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर हज़ारों किसानों ने अपना प्रदर्शन जारी रखा।

दुनिया का दूसरा सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश भारत अब कोरोना के दूसरे दौर के संक्रमण से जूझ रहा है, जो साल 2020 के पहले दौर के संक्रमण से कहीं ज़्यादा गंभीर है। दूसरी लहर के लिए कुछ वैज्ञानिक नए वेरिएंट को ज़िम्मेदार मानते हैं और अन्य ब्रिटेन में सबसे पहले मिले वेरिएंट को इसके पीछे बताते हैं।

कोरोना संक्रमण में ये उछाल 2014 के बाद से सत्ता में आने के बाद नरेंद्र मोदी के लिए सबसे बड़ा संकट है। ये देखना होगा कि संक्रमण को हैंडल करने का उनका तरीक़ा उन्हें और उनकी पार्टी को राजनीतिक तौर पर कैसे प्रभावित करता है?

अगले आम चुनाव 2024 में होने हैं। स्थानीय चुनावों के लिए मतदान हालिया मामलों के रिकॉर्ड उछाल के पहले ही पूरा हुआ है।

मार्च 2021 की शुरुआत में नए वेरिएंट को लेकर इंडियन सार्स-कोव-2 जेनेटिक्स कंसोर्टियम या INSACOG ने चेतावनी जारी की थी।

एक वैज्ञानिक और उत्तरी भारत में एक रिसर्च सेंटर के निदेशक ने पहचान नहीं ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया कि ये चेतावनी उस एक शीर्ष अधिकारी तक पहुंचाई गई थी जो सीधे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रिपोर्ट करते हैं।

रॉयटर्स ये पुष्टि नहीं कर सका कि क्या INSACOG की फाइंडिंग ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाई गई थी। रॉयटर्स ने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क किया, जहां से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।

वैज्ञानिक सलाहकारों का ये फोरम भारत सरकार ने दिसंबर 2020 के अंत में गठित किया था। जिसका मक़सद कोरोना वायरस के उन जीनोमिक वेरिएंट्स का पता लगाना था, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए ख़तरा हो सकता है। इस फोरम ने 10 राष्ट्रीय लैब को एक साथ लाया जो वायरस के वेरिएंट्स पर अध्ययन करने में सक्षम हैं।

फोरम के सदस्य और सरकार की ओर से संचालित जीव विज्ञान संस्थान के निदेशक अजय परिदा ने रॉयटर्स को बताया, INSACOG के रिसर्चरों ने फ़रवरी 2021 में ही B.1.617 का पता लगा लिया था, जिसे वायरस का भारतीय वेरिएंट कहा जा रहा है।

उत्तरी भारत के रिसर्च सेंटर के निदेशक ने रॉयटर्स से कहा, फोरम ने अपनी फाइंडिंग 10 मार्च 2021 से पहले भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल (एनसीडीसी) के साथ साझा की थीं और चेतावनी दी थी कि कोरोना संक्रमण भारत के हिस्सों में तेजी से बढ़ सकता है।

इस व्यक्ति के मुताबिक़, इसके बाद फाइंडिंग भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास पहुंचाई गईं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने टिप्पणी की गुज़ारिश पर कोई जवाब नहीं दिया है।

उसी तारीख़ के आस-पास, फोरम ने भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए मीडिया स्टेटमेंट का ड्राफ्ट तैयार किया था। उस ड्राफ्ट की एक कॉपी रॉयटर्स ने देखी है, जिसमें फोरम की फाइंडिंग बताई गई है: नए भारतीय वेरिएंट के दो अहम म्यूटेशन है, जो इंसानी कोशिकाओं से चिपक जाते हैं, उन्हें भारत के राज्य महाराष्ट्र के 15% से 20% सैंपलों में पाया गया है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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